ऐ आसमान से
लगातार गिर रही बारिश की
बेहिसाब बूंदों
तुम बरसना कब बंद करोगी
मुझे अपनी मंजिल तक
पहुंचने के लिए
कदम उठाने दोगी या
एक रास्ते के मोड़ के किनारे ही
कहीं जड़वत एक पेड़ के तने सा
खड़े हो जाने को बाध्य करोगी आसमान में सूरज कब निकलेगा अपनी तपिश की प्यार भरी गरमाहट को चारों ओर बिखेरता
इंद्रधनुष कब किसी कोने से
उजागर होगा
अपने अनुपम सौंदर्य की आभा
उकेरता
बारिश कब थमेगी
मेरे जीवन की रफ्तार कब बढ़ेगी बदलाव भी थोड़ा बहुत ही अच्छा लगता है
एक अति को पार कर जाना
सुख का अहसास नहीं
फिर दुख का कारण प्रतीत
होने लगता है।
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