मंजिल खुद हमें पुकार रही है


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जीवन के रास्ते थे
कठिन लेकिन
साथ मिला जो तुम्हारा तो
पार कर ही लिये
मंजिल के पहले पड़ाव को तो
पा लिया
पहाड़ के शिखर पर तो पांव अपना
धर दिया
सूरज की सुनहरी ऊर्जा को अपने भीतर भर लिया
आसमान के रंगों को भी अपनी झोली में समेट लिया
मंजिल के अभी तो कई पड़ाव और हासिल करने हैं
इस आसमान को छूना है
इसके पार भी जाना है
जमीं पर दीदार किये
फूलों की वादियों के
अब मुट्ठी में कैद करेंगे
बादलों की तितलियों को
मंजिल खुद हमें पुकार रही है
रास्तों को भी हमारे पैरों तले बिछा रही है
अभी तक हम हुए हैं सफल तो
आशा करते हैं कि आगे भी होंगे
तुम बस हौसले से कदम अपने उठाते जाना और
मुझ पर भरोसा करके
मेरे पीछे-पीछे आते जाना।


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