हवा भी
आज गुमसुम है
मेरी ही तरह
रवानगी से बहती
कोई कहानी भी नहीं सुना रही
जिंदगी की कहानियां
समझते और सुनाते हुए
उम्र भर
शायद मेरी तरह यह भी थक चुकी है यह कहना शायद यह चाह रही है पर कह नहीं पा रही कि
क्या सुनाऊं कुछ नया
देखा जाये तो जिंदगी में रखा ही
क्या है।
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