न रास्ता
न मंजिल
न कोई मोड़ है
राहों में
ऐसे में क्या ख्वाब बुनूं
कमरे की बंद खिड़की से
कोई चांद भी नहीं दिख रहा
आज रात के खुले आसमान में।
न रास्ता
न मंजिल
न कोई मोड़ है
राहों में
ऐसे में क्या ख्वाब बुनूं
कमरे की बंद खिड़की से
कोई चांद भी नहीं दिख रहा
आज रात के खुले आसमान में।
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