दिल खाली है
एक टूटे दर्पण सा
वीरान है
एक रेगिस्तान के सन्नाटे सा
बिना सांसों का है
एक बंजर भूमि सा
न इसके उपवन में
कोई फूल खिल रहा है
न ही कोई बहार गुलजार है
न कांटों की ही कोई सेज बिछी है
न ही पतझड़ से पत्तों का
कोई संसार सुशोभित है
दिल तो एक मजार सा बन
गया है
इस पर कोई फूलों की चादर
चढ़ाने आये
यह आस भी यह खो चुका है।
0 Comments