एक मीरा बनना ही पड़ता है


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बिना दीवारों के
कोई कमरा खड़ा नहीं हो सकता
बिना सितारों के
कोई आसमान रात में जवां नहीं दिख सकता
बिना रिश्तों में संजीदगी के
कोई घर एक फूलों के गुलिस्तां सा महक नहीं सकता
बिना सांसों की लय के
कोई जीवन का पहिया चल नहीं सकता
बिना अपनेपन के अहसास के
कोई एक पल जीवित नहीं रह सकता लेकिन
इस कांटों से भरे
जिंदगी के रास्तों को पार करने के लिए किसी स्त्री को अबला नहीं बल्कि सबला बनने का प्रयास निरंतर करना पड़ता है
उसे अंततः एक मीरा बनना ही पड़ता है विष का प्याला पीकर
उसे अमृत में बदलना होता है।


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