दिन भर धूप में
तपने के बाद
शाम से थोड़ी सी राहत मिलनी
शुरू होती है
जैसे जैसे रात गहराती है
वातावरण में ठंडक बढ़ती है
दिनभर की गर्मी के कारण
थकान कहीं गुना जो बढ़ती है तो
नींद गहरी आती है
यह घोड़े बेचकर सोने वाली
नींद होती है
सपने भी देखने का
मन नहीं करता
कोई भूले भटके तशरीफ लाता है तो सुबह तक भूली बिसरी सी कोई
याद बन जाता है
सोने से पहले ठंडे पेय पदार्थ
पीकर गले को तर करना मन को बहुत भाता है
खिड़की से चांद को निहारना
आंखों को शीतलता पहुंचाता है
तारों भरा आकाश
एक सपनों का जहां लगता है
रात अंधकार में डूबी होती है
हवायें चल जायें तो
सुकून के पल कुछ और मिल
जाते हैं
रात्रि के सारे दिलकश नजारे
यह इशारा करते हैं कि
रात काफी हो चुकी
अब सो जाओ
सुबह उठकर फिर
तपती गर्मी की मार तुम्हें ही
झेलनी है।
0 Comments