मां के जेवर का डिब्बा
उनके न रहने पर
मेरा है लेकिन
मां का था तो
उनका ही रहेगा
उनके न रहने पर भी
मेरी हिम्मत नहीं पड़ती
उसे तलाशने की
उसे छूने की या
उसे खोलने की
मन में कोई लालच भी तो
नहीं है
मुझे तो सबसे अधिक
इस दुनिया में मेरी मां ही
प्यारी थी
मां रहती जीवित तो
अपने आभूषणों को वह पहनती तो कितनी अच्छी लगती
मैं कोई व्यापारी नहीं जो
उनके जेवर ले जाकर
किसी खरीददार को बेचूं
मेरे लिए तो वह मेरी मां की
अमानत हैं
जो उनके होने का अहसास
मुझे उनके न रहने पर
ताउम्र दिलाते रहेंगे।
0 Comments