सांझ की बेला में
ढलते हुए सूरज की रोशनी
एक दीपक के प्रकाश सी
कितनी सुंदर प्रतीत हो रही है
यह समय गोधूलि का
प्रार्थना का समय है
दिनभर की थकान को मिटाने का समय है
मन की शांति को पाने का समय है अपने कार्यस्थल से
घर अपने प्रस्थान करने का समय है सबसे मिलने जुलने का समय है
हंसने खिलखिलाने खेलने का समय है दिल की बातें करके
मन का बोझ हल्का करने का समय है अपने घर की छत से
प्रकृति की छटा को अपलक निहारने का समय है
यह समय है किसी मेहमान के
इंतजार का
फूलों की खुशबुओं से भरी बहार के खुमार का
रात्रि के चांद के दीदार का
आंखों में उतरते नींद भरे ख्वाब का एक नई आशा भरी सुबह होने का।
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