अपने बचपन में पुनः लौटो


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तुम मासूम हो
तभी हर क्रियाकलाप को देखकर आश्चर्यचकित हो रहे हो
तुम्हारे जन्म लेने के पश्चात
इस जीवन की हर घटना
तुम्हारे लिए पहली है
धीरे धीरे उम्र बढ़ने के साथ
तुम्हें इनकी आदत होने लगेगी और
यह सब क्रियायें जो तुम्हें पहले
विस्मित करती थी
अब समय के साथ सामान्य
प्रतीत होंगी
तुम जो पहले एक प्राकृतिक
व्यवहार करते थे यानी
जब हंसना चाहते थे तब
हंसते थे
जब रोना चाहते थे तो
खुलकर रोते थे
तुम कहीं से किसी भी प्रकार से
बाधित नहीं थे
तुमने इस दुनिया में रहकर
कुछ सीखा तो बस इतना भर कि सामने वाला जो चाहे
वह करो
तुम्हारा मन कर रहा है
जी भर कर रोने का लेकिन
दुनिया को दिखाने के लिए
तुम मुस्कुरा कर खुश होने का
ढोंग करो  
तुमने एक बच्चे के समान सामान्य,
प्राकृतिक, मासूमियत से भरा
व्यवहार करना कब छोड़ दिया
इसका तुम्हें
आभास नहीं हुआ
तुम्हें नहीं लगता कि
तुम्हारा व्यवहार
असामान्य हो चला है
इसका स्मरण करो
पुनः अपने बचपन में लौटो
दोबारा उसे पाने का
प्रयत्न करो।


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