यह सच है कि
मैं बिना साहित्य
बिना रचनात्मकता
बिना कविता के
एक पल के लिए भी
नहीं जी सकती
इस धरती पर मेरे जन्म के साथ ही कविता मुझसे चिपक गई ऐसे जैसे लोहा चुंबक से चिपक जाता है
यह प्रक्रिया कुदरती है
मेरा इसे प्राप्त करने में कोई खास योगदान नहीं है
मैं तो इतना भर जानती हूं कि
किसी के जिंदा रहने के लिए जैसे उसकी सांसों का आवागमन
आवश्यक है
ठीक वैसे ही मुझ जैसी एक पैदाइशी कवयित्री के लिए कविता का दामन पकड़े रखना
जरूरी है
कविता लिखकर मुझे जो संतुष्टि, आत्मिक संतोष, बल आदि प्राप्त होता है
वह अन्यथा कहीं नहीं
काश मैं एक सामान्य जीवन जीती रहूं और
कविता अपनी आखिरी सांस तक लिखती रहूं
कविता के प्रति मेरी रुचि कभी कम
न हो
मेरे को भगवान बुद्धिशाली
बनाये रखें
मेरा तन मन आत्मा
मेरा दिमाग
मेरा परिवेश
मेरा जीवन
मेरा स्वास्थ्य आदि
सब ठीक रखें ताकि
मैं अपना संपूर्ण जीवन
साहित्य को और उसमें भी मुख्यतः कविता को अर्पित कर दूं
मेरी तो पहली और अंतिम इच्छा
बस कविता लिखना ही है
और वह पहुंचे लोगों तक
किसी भी माध्यम से
वह सब उसे पढ़ें
समझें और
जीवन में उतारें व
उसे सुधारें
कविता के जरिये जीवन जीने
के लिए कोई उद्देश्य मिला
जो सपना देखा वह साकार हुआ
जो चाहा उसे पाया
इतना ही काफी है
कविता ही मैं ताउम्र लिखती रहूं
इतना काफी है
इससे अधिक मुझे कुछ और
नहीं चाहिए।
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