मेरा रोम रोम एक मंदिर है


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मेरे घर में
एक मंदिर है
घर के समीप भी
किसी भी रास्ते पर चलो तो
पग पग पर लेकिन
मेरे मन में भी एक मंदिर है
मेरा तन एक मंदिर है
मेरा मन एक मंदिर है
मेरी आत्मा
मेरी सांसें
मेरी मिट्टी से बनी काया
का हर कण
मेरे जीवन का हर क्षण
मेरा रोम रोम एक मंदिर है
मंदिर है यह एक पावन सा
सुगंधित सा
एक सच्चे सारथी सा
भक्ति के किसी गहरे सागर सा
एक शीतल चंदन बन सा
एक महकते फूलों की शैया सा
भगवान के ही एक मोहक रूप सा
उनके आशीष की एक पवित्र
जलधारा सा
उनकी मृदु वाणी की एक
कानों में हर पल बजती मीठी झंकार सा
मेरा शरीर एक मंदिर है
इसे भगवान मिलता है इसी मंदिर में
इसे नहीं आवश्यकता उन्हें
अपने से अलग बाहर कहीं खोजने में।


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