यह जीवन चक्र


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दिन जो निकलता है
उजाला चारों तरफ फैलता है
दिल में एक आशा का कंवल भी
खिलता है
कल की निराशा को
एक कल के ही सांझ के
ढलते हुए सूरज की तरह
पीछे छोड़ता हुआ
सुख दुख का तो
दुख सुख का पीछा
जीवन से लेकर मृत्यु तक
करते ही रहते हैं जैसे
एक दूसरे के साथी हों
एक दूसरे के हमराही
एक दूसरे की परछाई
सुबह से रात हो जाती है
उजाले से अंधकार
यह जीवन चक्र ऐसे ही चलता रहता है मृत्यु पर्यंत तक।


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