आज का दिन
बहुत गर्म था
मुझे लगा जैसे कि
मैं एक जलते हुए लाल
सूरज के अंगारे की अंगीठी के
ऊपर बैठी हूं
सूरज की गर्मी थोड़ी सी पिघल जाये तो मुझे उसकी नारंगी काया का अस्तित्व भी दिखे
उसकी पीले किरणें एक स्वर्ण के आभूषण सी प्रतीत होती तो
उन्हें मैं अपनी देह के
अलग अलग अंगों में पहन लेती
यह एक हरा तोता
नीले आकाश में उड़ता
न जाने कहां से आ गया
मुझसे जामुन के बगीचे का
पता पूछ रहा था
आज उसका मन हरी मिर्च नहीं बल्कि जामुनी जामुन खाने के लिए
ललचा रहा था
मैं भी खेत में से एक बैंगनी
बैंगन चुराकर खाने के लिए
सूरज की जलती बुझती अंगीठी पर
से उठकर तोते की पीठ पर सवार
हो शीतलता खुद में भरने के
लिए चल पड़ी उसके साथ।
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