एक दरख्त की टहनी पर


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एक दरख्त की टहनी पर
फूलों के गुच्छे लहराये
बिन कहे ही कुछ
ऐसा लगा जैसे
खिली हुई बहारों का महकता सा कोई संदेशा लाये।

एक पेड़ की छाया ही काफी है
एक थके हुए मुसाफिर के लिए
आगे का सफर तय करने के लिए
उसके घनेरे पत्तों का सिर पर तना शामियाना ही बहुत है
पल दो पल को राहत पहुंचाने के लिए।

वृक्ष थे हरे पत्तों से लदे और
कतारों में सैकड़ों की संख्या में सजे कोयल की कूक से पर वंचित
शहरों के बाग एक जंगल बनने की कोशिश भर कर रहे थे लेकिन
इसमें वह सफल होते नहीं दिखे
शहर की भीड़ के शोर से
सारी कोयले भाग गई जंगल की
ओर जिन्होंने कभी
जंगल से शहर के बागों में आने की हिम्मत जुटाई थी।

ऐ तरु सुनो तुम्हारे सानिध्य से
सबको तरावत तो मिलती है
इतनी जलती दोपहरी में एक
तुम ही हो जो कुछ शीतल से
प्रतीत होते हो
तुम्हारी छाया में बैठकर
ठंडे जल की कुछ छींटे
मुंह पर मार लूं और
मीठे शरबत से अपना गला भी
तर कर लूं तो
इस रेगिस्तान की गर्म लू से
खुद को बचाने में हो सकता हूं सफल।

सड़क के किनारे खड़ा एक पादप
शायद सुन रहा है
भरी दोपहरी के सन्नाटे में मेरे
कदमों के पदचापों की आवाज
तभी तो खुशी से लहरा उठा है जबकि हवा का कहीं न नामो निशान है।

पुष्पद पर देखो तो
कितने पुष्प लद गये हैं
इसके पत्ते हरे और
पुष्प हैं लाल
रंगों का एक मेला सा जैसे सज
गया है
रंग भी हैं
सुगंध भी है
रूपवान भी है
धैर्यवान भी है
गुणों की यह खान है
जितने चाहे सबक इससे
सीख लो
यह तो सीखाने को हरदम ही तैयार है शर्त पहली और आखिरी यह है कि
तुम जो यह शिक्षा दे उसे
एक आज्ञाकारी शिष्य की तरह अपने इस
गुरु से सहर्ष ग्रहण करने को तैयार हो।


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