रिश्तों की बगिया में
फूलों का एक सुंदर संसार नहीं मिलता अपितु
कांटों का एक घना अंधकारमय जंगल मिलता है जहां
एक बार कोई फंस गया तो
अपनी जगह से हिल भी नहीं सकता
सुबह का पहाड़ियों के पीछे से
उगता सूरज नहीं देख सकता
आसमान का कोई रंग नहीं देख सकता आकाश में पंछियों को
इधर से उधर उड़ते हुए नहीं देख सकता सांझ को सूरज को डूबते हुए नहीं
देख सकता
रात्रि में चांद की सुंदरता का दीदार
नहीं कर सकता
फूलों की सुगंध को खुद में
समाहित नहीं कर सकता
हवाओं के शीतल झोंको को
अपने तन बदन को छूकर गुजरता हुआ नहीं देख सकता
प्यास लगने पर जल की तलाश नहीं
कर सकता
भूख लगने पर किसी पेड़ पर लगे फल को
तोड़कर नहीं खा सकता
अपनी छोटी से छोटी
ख्वाहिश को
इन रिश्तों के जाल में उलझ कर
पूरी नहीं कर सकता
समर्थ होते हुए भी
पूरी तरह से
असमर्थ महसूस करता है कोई
भीतर से मन हरदम रोता है लेकिन
किसी का कंधा भी नहीं मिलता तो
इतनी हताशा में लाख चाहकर भी
रो नहीं सकता।
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