मैं तो मानती हूं
इस संसार को अपना घर और
इसके हर सदस्य को अपना परिवार
मानो तो हर कोई अपना है अन्यथा अपनी सांसे भी उधार की हैं
जो कुछ है वह दिल में है
जैसी सोच होगी
यह दुनिया वैसी ही प्रतीत होगी
अपनी सोच समझ का दायरा
बढ़ाने से
लाभ अधिक
नुकसान कम होता है
यह बात हर कोई गांठ बांध ले
खून के रिश्ते ही सब कुछ नहीं होते
दिल के रिश्ते और
इंसानियत के रिश्तों का स्थान
उनसे ऊपर होता है
किसी को अपनाओगे तो
उसके लिए थोड़ा बहुत सही पर
कुछ कर पाओगे
हर किसी को ठोकर मार कर
ठुकराओगे तो
फिर कहां से
थोड़ा भी प्यार,
मान सम्मान या
अपनाहट का भाव पाओगे
हर किसी से प्रेम करना
उसका सहयोग करना
उसे अपनाकर चलना ही
इस जीवन का आधार है
और
जीवन को सही प्रकार से जीने का
तरीका भी
नहीं तो इस जीवन का उद्देश्य फिर भला है ही क्या।
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