रिश्तों की दीवार में दरार है


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रिश्तों की दीवार में
दरार है
उस पार क्या हो रहा है
यह देखा जा सकता है पर
देखने का मन नहीं
दिल भर चुका है अब इतना कि
इसे अब और भरने की कहीं जगह नहीं इसे तो अब बस खाली करना है और
एक चैन भरी सुकून की सांस लेनी है
खुद को एकाग्रचित करते हुए
बेकार के लोगों और उनकी बेमतलब बातों में
बिना कहीं अनावश्यक रूप से अपना ध्यान भटकाये।


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