आज रहना है खामोश
किसी से कुछ नहीं कहना है
खुद से लेकिन बोलना या
संवाद करना
क्या कहीं रुकेगा
शायद नहीं तो
चुप रहने से क्या हुआ फायदा
मौन को कहीं अंतर्मन में गहरे
उतारना है
शांत रहना है
स्थिर रहना है
कुछ देर को सही पर
एक ठहरे हुए चांद सा ही
कहीं खुद के मन को ठहराना है
मन के विस्तृत आसमान पर।
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