एक सुबह ऐसी आयेगी कि


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परेशान हूं मैं
सच में
बस हूं
कारण मत पूछना
बता नहीं पाऊंगी
परेशानियां एक नहीं, अनेक हैं
खुद में कहीं गहरी उलझी पड़ी हूं सुलझाने की कोई कोशिश मत करना नहीं तो
और उलझ जाऊंगी
कुछ देर के लिए
मुझे अकेला छोड़ दो
कुछ रातें चांद के साथ गुफ्तगू
करने दो
जल्द ही एक सुबह ऐसी आयेगी कि
मैं एक सूरज के फूल सी ही खिलखिलाती हुई
अपना बिस्तर छोड़
दिनचर्या के कार्यों के लिए
कमर कसकर
पूरी हिम्मत से
अपना मनोबल बढ़ाती
खुद को अपनी बाहों का सहारा देती
उठकर खड़ी हो जाऊंगी।


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