एक सर्वगुण संपन्न कन्या हूं मैं


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सिर पर
मेरे ताज है
शिक्षा का,
हुनर का,
काबिलियत का,
सद्गुणों का,
संस्कारों का
एक सर्वगुण संपन्न कन्या हूं मैं
न कोई बोझ हूं अपने परिवार या समाज पर
सूर्य की एक किरण सी चमकती हूं
जग में उजियारा फैलाती हूं
हर किसी को अपनाकर चलती हूं
हर किसी को आगे बढ़कर गले लगाती हूं हर किसी के दुख दर्द बांटती हूं
हर किसी के बुझे चेहरों को फूलों सा खिलाती हूं
सबका हित चाहती हूं
सबका भला करती हूं
एक बात लेकिन है बड़े अफसोस की
कि हर किसी को तो नहीं लेकिन
कुछ को अभी भी एक किरकिरी की तरह
उनकी आंखों में चुभती हूं।


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