यह रिश्ता
एक बच्चे का उसकी मां के साथ
उसके जन्मदाता,
उसके अभिभावक के साथ
एक उम्र भर चलने वाला अटूट पावन रिश्ता है
यह बंधन है जन्म-जन्मांतर का
इस रिश्ते को भी जो नकारे
उस जैसा पापी इस संसार में कोई नहीं किसी जीवात्मा का अस्तित्व ही नहीं हो सकता
उसके जन्मदाता के बिना
उनका भी जो हृदय से सम्मान न करे तो भगवान भी उस अधर्मी को कैसे माफ करे
मुझे तो जैसे मां-बाप मिले
भगवान सदृश्य मिले
मेरी तो प्रभु से यही है कामना कि
मुझे अगले या हर जन्म में वही
मेरे मां-बाप के रूप में मिलें।
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