जिंदगी से
तुझे कितनी शिकायतें हैं
ऐ पल दो पल के मुसाफिर
तेरी जिंदगी का सफर
तेरी शिकायतों की फेहरिस्त से छोटा है जिंदगी भर
क्या तू बस शिकायतें ही करता रहेगा खुद की तरफ
निगाह उठाकर देखने का या
किसी को प्यार करने का
फिर तू
समय कब निकालेगा।
जिंदगी से
तुझे कितनी शिकायतें हैं
ऐ पल दो पल के मुसाफिर
तेरी जिंदगी का सफर
तेरी शिकायतों की फेहरिस्त से छोटा है जिंदगी भर
क्या तू बस शिकायतें ही करता रहेगा खुद की तरफ
निगाह उठाकर देखने का या
किसी को प्यार करने का
फिर तू
समय कब निकालेगा।
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