अंधकार का आरंभ ही


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दिन या रात
उजाला या अंधकार
एक जलता हुआ चिराग या
एक बुझा हुआ आफताब
इनमें से मुझे किसी एक को चुनना हो तो
मैं अंधकार को चुनूंगी
अंधकार में मैं खुद को भी
देख नहीं पाती तो
खुद को खुद के बेहद करीब पाती
आसपास का कोई दृश्य या सामान
मेरा ध्यान नहीं भटकाता
एक यह अंधेरा ही है जो
मेरी मुलाकात मुझसे करवाता
अंधकार में डूबे अपने कमरे में,
खिड़की से मुझे चांद जो दिख जाता
वह मुझे शीतलता देता
सुबह के सूरज सा मेरी देह को
नहीं जलाता
अंधकार का आरंभ ही
मन में एक असीम शांति की लहर लहराता
उसमें उतरकर मन कितना
आराम पाता
खुद को कहीं भीतर से जान
पाता
एकाग्रता से कुछ मनन कर
पाता
ध्यान लगा पता
एक मीठी सुकून भरी गहरी नींद सो पाता।


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