मेरी दोस्त
तुम एक सितारा बनकर
हर रात
आसमान में मुझे
सदियों तक दिखती रही
अब कहां हो
क्या जहां थी वहीं हो
हो सकता है
उम्र के इस लंबे सफर में
मेरी आंखें ही कमजोर होकर
सब कुछ धुंधला देखने लगी हैं
पिछली बातें भूलने लगी हैं
इस दुनिया को भी कम
परखने लगी हैं
खुद में कभी सिमटकर तो
कभी खुद से दूर होकर
खुद को भी अब बिसराने
लगी हैं।
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