ओ जुगनू टिमटिमाते
तुम आसमां के सितारे को
जमीं पर उतार क्यों नहीं लाते
उसके संग एक नया संसार बसा क्यों नहीं पाते
तुम रात की ही तरह
दिन की रोशनी में
अपनी जगमगाहट चारों ओर
बिखेर क्यों नहीं पाते
तुम खुद भी एक सितारा
बन क्यों नहीं पाते
तुम एक चांद की ही तरह
रात्रि के आकाश पर चमक
क्यों नहीं पाते
अपने सौंदर्य की आभा
एक किरण सी आसमां से जमीं की तरफ उतार क्यों नहीं पाते।
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