तुम भी आज एक फूल सी खिली हुई दिख रही हो
इस गुलशन के सारे फूल
तुम्हारी सुंदरता के मुकाबले
कुछ फीके लग रहे हैं
तुम हो कि फिर भी संभवतः
इनको खुद से अधिक महत्व दिये चली जा रही हो
इनके सौंदर्य,
इनकी महक,
इनके गुणों को खुद में समाहित करने की कोशिश कर रही हो
इनमें समा जाने का प्रयत्न कर रही हो इनके रूप रंग में कहीं खो जाना चाहती हो
इनके संसार में कहीं रच बस जाने की इच्छुक प्रतीत हो रही हो
इन फूलों की तरह
इन पर तुम भी
अपना बेइंतहा प्यार लुटा रही हो
अपना सर्वस्व न्योछावर कर रही है
सच बताऊं तो इन फूलों से तुम इश्क कर रही हो।
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