आंखों में आंसू
बेशक न आते हों लेकिन
दिल तो परेशान अक्सर हो जाता है आंखों को कोई बंद कर भी ले
लेकिन इन दिल की आंखों का क्या
जो सब कुछ देख, समझ और
समुद्र तल की गहराइयों सा ही कहीं
महसूस कर लेती हैं
आंखों के आंसू तो सूख गये
दिल के आंसुओं का समुंदर भी
जो सूख जाये तो
बात बने
शाम का डूबता सूरज मुझे
जलाना छोड़े
एक ठंडी पुरवाई मन के समुन्दर के किनारे चले तो
होठों की मेरी किनारियां
जरा सी लहरायें और
मेरे लबों को खिलखिलाकर
हंसी आये।
0 Comments