पत्र लिखते समय
लिखने वाले के मन में
एकाग्रता होती है
वह अपनी आंतरिक भावनाओं को
बिना किसी रूकावट के
उकेर पाता है
तभी तो अपने मन के भावों को
पूरी स्पष्टता के साथ
एक कोरे पन्ने पर सहजता से
शब्दों के माध्यम से उतार पाता है
किसी का पत्र ही होता है
सही मायने में उसके दिल का
आईना
सामने पड़ने पर तो
किसी को कहना कुछ और होता है लेकिन वह कह कुछ और जाता है
किसी के पत्र से यदि
प्रेम का भाव छलकता है तो
वह जीवन के अंतिम क्षण तक
कायम रहता है क्योंकि
उसमें सच्चाई का भाव
विद्यमान होता है
जो पत्र में अपमानजनक भाषा का
प्रयोग करता है
वह जीवन भर कभी नहीं सुधरता है
पत्र में लिखी भाषा
पत्र लिखने वाले के चरित्र को
दर्शा देती है
पत्र के आधार पर उस व्यक्ति से
संबंधित जीवनपर्यंत के फैसले
लिए जा सकते हैं और
जहां तक है ऐसे रिश्ते
स्थाई, भारी भरकम और जीवन भर चलने वाले होते हैं।
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