तुम भी मुझे तो
एक देवी सी ही प्रतीत हो रही हो
एक लाल चुनर सुनहरी गोटे की
किनारी वाली ओढ़कर
तुम्हारा चेहरा चमक रहा
एक पूर्ण रूप से खिले हुए
लाल सूरज सा ही
तुम्हारे हाथों की कलाइयों में
सजी लाल चूड़ियां और
तुम्हारी हथेलियों पर
गाढ़े लाल रंग की मेहंदी
आपस में हमजोली सी
बनी हुई मालूम पड़ रही हैं
दोनों एक दूसरे में जैसे हो जज्ब
दोनों के रंग एक दूजे से मेल
खा रहे हैं
सूरज की किरण जो
पड़ती है तुम्हारी नाक में
पहनी हुई नथ पर तो
उसमें जड़े हुए लाल रंग के नग
अचानक चारों तरफ
लश्कारे से मारने लगते हैं
तुम्हारे चेहरे के रंग पर भी
लाली छाई हुई है
तुम्हारे सौंदर्य की
तुम्हारी गरिमा की
तुम्हारी शर्मो हया की
तुम्हारी मादकता की या
तुम्हारी लाल चुनर के
प्रतिबिंब सी
तुम्हारी लाल प्रतिध्वनि
की गूंज सी ही।
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