पानी का एक बुलबुला हूं मैं
मेरा क्या सिलसिला होगा और
वह भी मोहब्बत का
इबादत का
मुस्कुराहट का
हिफाजत का
नफासत का
भूल जाओ
ऐसा कभी कुछ भी नहीं होगा
जब तक यह सोच पाई और
कुछ देखने को जो खुद को तैयार कर पाई
मैं ठहरी पानी का एक बुलबुला
फूट चुकी होंगी
मैं रहूंगी ही कहां
हवाओं में घुल चुकी होंगी।
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