बर्फ की चादर से ढकी वादियों के
सीने में जलते अलाव
जैसे सदियों के जमे जख्म
दिल की भीतरी तहों में
पिघलने को हो रहे हों बेताब
इस सर्द मौसम ने
सब लोगों को उनके घरों में बंद कर दिया है
एक दूसरे के करीब उन्हें लाने का
जिंदगी ने एक बार फिर
सुनहरा मौका दिया है
वह उम्र भर महफूज रहेंगे
एक दूसरे की बाहों में ही अपनी
गुजर बसर करेंगे
ऐसा भरोसा दिया है
जख्म कांटों भरी चुभन के कुछ
कम होंगे
फूल वफाओं के मोहब्बत भरी राहों में खिलेंगे
एक नये रोशनी भरे सूरज की उगती हुई गर्माहट के साथ।
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