कोई सोचेगा
मेरे बारे में कि
यह कैसी बातें करती हैं लेकिन
शायद यह हर किसी के जीवन के
अपने निजी अनुभव होते हैं
जिनमें से मधुर कम और कड़वे अधिक जो इस तरह की सोच या मानसिकता को जन्म दे ही देते हैं
कई बार यह मानसिक स्थिति कुछ समय के लिए बन जाती है फिर
धीरे-धीरे सब ठीक हो जाता है
बात बस यह कहना चाह रही थी कि कभी एक समय ऐसा भी था
मेरी जिंदगी में जब
किसी छोटी सी बात से भी बहुत अधिक खुश या आश्चर्यचकित हो जाती थी मैं अब हालात कुछ ऐसे हो गये हैं कि
कोई भी चीज न अपनी ओर
आकर्षित कर रही है और न ही
आश्चर्यचकित
कुछ उपहार अभी हैं बाकी जो
मुझे आश्चर्य में डाल सकते हैं जैसे
मेरे बिछड़े मुझे मिल जायें
किसी रोज भगवान के मुझे दर्शन हो
पायें
एक लंबे समय से जो मैं अपनों से
किसी कारणवश नहीं मिल सकी
किसी तरह से उनसे मिलना हो जाये
इस साल एक मनोकामना या
उपहार अपने लिए यह मांगती हूं
सबसे कि मेरे लबों पर
मुस्कान बिखर जाये और
यह बनी रहे हमेशा के लिए
बेशक कितनी भी हों
विषम परिस्थितियों मेरी।
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