यह प्रेम का गणित


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तुम्हारी आंखों में
मुझे अपना चेहरा दिखता है
तुम जब झांकती हो
मेरी आंखों में तो
तुम्हें क्या दिखता है
मेरे दिल में तुम्हारा दिल रहता है
और तुम्हारे दिल में भी क्या मेरा
दिल रहता है
यह प्रेम का गणित उतना भी आसान नहीं
जितना लगता है
उम्र भर जिस प्रेम को तुम समझते हो सच्चा
वह जीवन के आखिरी पड़ाव पर
झूठा लगता है
दर्पण झूठ नहीं बोलता लेकिन
आंखों के दर्पण कई बार या
यूं कहें कि अक्सर चकमा
दे जाते हैं
प्यार, मोहब्बत, इश्क की
राहें
कई बार एक तरफा भी हो
सकती हैं
प्रेम करिये
दिल खोलकर लेकिन
सावधान रहिये
आंखों में उतरने किसी के
कपट, मिलावट, बेईमानी,
बेअदबी और छल से।


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