प्रेम को तो आकाश की तरह अनंत होना चाहिए


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मेरे जीवित होने पर
जब कोई मुझे याद नहीं करता तो
मेरे मरने के बाद क्या करेगा
प्रेम को तो आकाश की तरह अनंत
होना चाहिए
इसे यह जमीन के बाशिंदे इतना
सीमित क्यों बना देते हैं
दिल को दिल से जोड़ते
आत्मा का सफर आत्मा तक तय
करते रिश्ते क्या अब बचे ही
नहीं हैं
न किसी की नजर में कोई प्यार की कशिश दिखती है
न किसी के व्यवहार में उसके इंसान
होने की कोई वजह मिलती है
सब कुछ बिना धड़कन का
एक बेजान पत्थर सा प्रतीत होता है लगता है कि भगवान ने इस दुनिया को बनाकर एक बहुत बड़ी भूल कर दी
मिट्टी के बुतों में उसने जान तो
डाल दी
एक दिल भी लगा दिया
लेकिन समय की विपरीत आंधियां
कुछ ऐसी चली कि
वह धड़कना भूल गये
प्रेम का सबब बिसरा गये
प्रेम करने का तरीका
खुद के साथ और
दूसरों के साथ उपेक्षित कर गये।


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