कोई निमंत्रण हो प्रेम विहीन तो उसे भला कौन स्वीकारेगा


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कोई भी निमंत्रण
प्रेम की भावना से जो हो परिपूर्ण तो बहुत ही अच्छा महसूस होता है
किसी कारणवश जहां आमंत्रित हैं
वहां जो पहुंच न सके तो
खुद को आत्मग्लानि होती है लेकिन किसी ने किसी को याद रखा
तभी तो एक निमंत्रण उसने
आपके घर तक पहुंचाया
कहीं कोई बुलाये और
आप जो पहुंच सकने में हों असमर्थ तो उसे धन्यवाद, अपना असीम स्नेह और आशीष तो अवश्य ही दें
फूलों का गुलदस्ता
कुछ मीठा
कोई तोहफा पहुंचा सकें
फिर तो
कहने ही क्या हैं
किसी के दुख में या
सुख में शरीक हों तो
पूरी तन्मयता से
यह दिखावे के खेल छोड़ दें
सबको अपना मानें
दिल में कुछ लोगों को पराया मानते हुए एक भेदभाव की जो रेखा खींच रखी है
उसे हो सके तो मिटा दें
इस पूरी कायनात को अपना घर मानें और
इसमें रह रहे हर सांस लेते जीव जंतु को, मनुष्य को अपने परिवार का सदस्य किसी की खुशियों में कभी पूरी तौर पर शामिल होकर तो देखें कि
खुद के चेहरे की रंगत भी एक फूल सी कैसे खिल उठती है
कई बार निमंत्रण व्यावसायिक भी होते हैं जिनमें औपचारिकता सर्वोपरि होती है लेकिन प्रेम के अभाव में सारी गतिविधियां व्यर्थ होती सी दिखाई पड़ती हैं
एक कूड़े के डिब्बे में कचरे की तरह जाती हुई
प्रेम का तड़का लगाना जिसे संबंधों के जालों में नहीं आया तो
उसने आज नहीं तो कल सब कुछ
एक जाती हुई कमाई सा ही मानो कि गवाया
कोई निमंत्रण हो
फूलों की खुशबुओं भरा आकर्षक लेकिन प्रेम विहीन तो
उसे भला कौन स्वीकारेगा
हर कोई उसे ठुकरायेगा
यह जाम हो जो प्रेम छलकाता तो
हर कोई उसका स्वाद चखना चाहेगा।


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