मेरे मां-बाप के
मरने के बाद
मेरे मां-बाप का ही घर छोड़ने के लिए
मुझे मेरे भाई बहन और
उनके बच्चे कहते हैं
मेरा घर मेरा नहीं है तो
यह जो अन्य परिवार के सदस्य
यह सब कहते हैं तो
उनका घर भी वह किस
आधार पर है
घर तो न मेरा है
न उनका है
यह तो हम सबके मां-बाप का है और
उस घर पर सबका अधिकार है
वो जो उस घर को अपना
कहने का दावा ठोकते हैं
वह यकीनन एक मजबूत स्थिति में
खुद को पाते हैं तभी
वक्त के हाथों मजबूर
हम जैसे किसी कमजोर को
सताते हैं।
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