मैं क्यों खुश करूं
कभी इसको
कभी उसको
सारी उम्र ऐसे ही निकल जायेगी
किसी के लिए कितना भी कुछ कोई क्यों न कर ले
आज तक किसी को इस वजह से
खुश होते देखा है
मेरी जिम्मेदारी इतनी भर तो पर
बनती है कि
मेरा व्यवहार हर किसी से सामान्य हो दिल में सबके प्रति स्नेह,
आदर और सम्मान हो
सबसे एक जुड़ाव सा महसूस होता हो
सबसे प्यार का एक सिलसिला सा चलता हो
सबसे मित्रतापूर्ण एक संस्कारी सा वार्तालाप हो
अपना नुकसान करके
मैं लगातार प्रयत्न करूं कि
मैं सबको खुश कर पाऊं तो
यह कभी संभव नहीं हो पायेगा
खुशी की मिठाई से कभी किसी का पेट भरना उचित भी नहीं है
दूसरों में कमियां निकालना
दूसरों की बुराई करना
दूसरों को तकलीफ पहुंचाना
यह आमतौर पर एक आम आदमी की प्रकृति होती है
फिर मैं कौन हूं इस तरह के
प्रकृति के तत्वों से छेड़छाड़
करके उन्हें शांत करने वाली।
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