जब मुझे कोई नहीं जानेगा
तब जान पाऊंगी कुछ हद तक
शायद थोड़ा बहुत मैं खुद को
मेरी मंजिल यह दुनिया नहीं
अपने काम के लिए वाहवाही
लूटना मेरा पेशा नहीं
मेरी फितरत नहीं
मेरी जिंदगी की कमाई नहीं
कर पाई जो आखिरी सांस तक
अपने मन का सा कुछ
बेशुमार तो
मशहूर होना होगा तो
वह हो जाऊंगी मरने के भी
बाद।
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