किसी के हो या न हो लेकिन
मेरे बिस्तर के नीचे तो एक राक्षस
स्थाई रूप से रहता है
शाम का धुंधलका रात के अंधियारे की तरफ
जैसे-जैसे अपने पैर पसारता है
वह राक्षस भी मेरे बिस्तर के नीचे से
धीरे-धीरे अपनी गतिविधियां शुरू कर देता है
कभी-कभी तो मुझे लगता है कि
जैसे उसने नीचे से मेरे पलंग को हिला दिया
उसने वैसे एक दोस्त की तरह ही
मेरे अकेलेपन को हमेशा बांटा है
कभी मुझे किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं
पहुंचाया
रात भर जागकर वह एक चौकीदार की तरह
मेरी रखवाली करता है
सुबह मेरी आंख खुलने पर वह मुझे
कहीं महसूस नहीं होता
शायद किसी गुप्त स्थान पर रात भर की थकान मिटाने के लिए
विश्राम करने के लिए
शाम तक तरोताजा होने के लिए
चला जाता है
कभी सुबह जो मैं अपने कमरे का पर्दा एक झटके से खोलूं तो
बाहर मेरी खिड़की में बैठी बिल्ली
उसकी आहट पाकर एकाएक घबराकर
फर्श पर
कूद जाती है और गुस्से से
बार-बार मुड़कर मुझे देखती हुई जैसे कहती
हुई सी जाती है कि
जाती हूं अभी तेरे राक्षस के पास
तेरी शिकायत करने कि सुबह सोती हुई मुझ बिल्ली
को एक शरारती लड़की ने गहरी नींद से जगा दिया
सुबह से शाम तक का समय बिना राक्षस के व्यतीत होता है
अठखेलियां करते बंदरों के साथ कलाबाजियां खाते
उनके बच्चों के साथ कूदती फांदती गिलहरियों के साथ
शोर मचाकर हवाओं संग उड़ते तोतों के साथ
मटक मटक कर चलते कबूतरों के साथ
गली में तने से घूमते कुत्तों के साथ
धूप में आराम करती गाय भैंस बकरियों के साथ
कभी कभार इक्का-दुक्का दिखते भांति भांति के
परिंदों के साथ
रात होने पर सुबह तक तो फिर
मेरे बिस्तर के नीचे मेरा राक्षस मेरे साथ रहेगा ही।
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