सब्जी या फल
कच्ची खाना
किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए
सबसे अधिक फायदेमंद है
तत्पश्चात उबली हुई
नमक के साथ या
नाममात्र के मसालों के साथ
कोई सब्जी या भोजन नियमित रूप से भी जो पकायें तो
वह एक निश्चित मसाले सही मात्रा लेने और
सही अनुपात डालने पर ही
स्वादिष्ट बन पाता है
सही आंच पर, सही बर्तन में,
सही समयावधि में
ध्यानपूर्वक पकाना भी चाहिए
नहीं तो सारी मेहनत पर पानी
फिर जायेगा
सब्जी कच्ची भी रह सकती है
जल भी सकती है
स्वादिष्ट नहीं भी बन सकती
कहने का तात्पर्य यह है कि
एक छोटे से कार्य में भी
कितनी निपुणता, ध्यान और समर्पण भाव चाहिए
मसालों या तेल का अधिक प्रयोग करने से क्या
किसी व्यंजन के स्वाद को बढ़ाया जा सकता है
‘नहीं’, कदापि नहीं
यही बात जीवन के संदर्भ में भी लागू होती है
जीवन भी हर दिन, एक लंबे समय तक या जब तक यह है
एक भोजन की तरह ही है जिसमें
इससे संबंधित अनगिनत मसालों का प्रयोग जाने अनजाने होता रहता है
जीवन से जो कुछ भी जुड़ा है वह
इसमें उपयोग आने वाले नाना प्रकार के मसाले हैं
इनका चयन सावधानीपूर्वक व्यक्ति विशेष
को ही करना होता है
जैसे मसाले वह इस्तेमाल करेगा
उसका जीवन वही आकार लेकर
मुंह दायें बायें करता समय के बर्तन से बाहर निकल आयेगा
जीवन का व्यंजन तीखा चाहिए,
मीठा चाहिए, चटपटा चाहिए,
फीका चाहिए या नहीं भी चाहिए
यह तय अपने जीवन के भोजन की थाली पकाने वाले को ही करना है
मसालों की लंबी कतार उसके समक्ष होती है
उसे इस पाककला में समय के साथ खुद को माहिर बनाना पड़ेगा गर
उसे अपने मन मुताबिक मसालों का
एक जीवन रूपी स्वादिष्ट व्यंजन का
भरपूर स्वाद चखना है तो।
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