मैं सच पूछा जाये तो
इस जीवन में हर किसी की ऋणी हूं
इस संसार के कण कण की,
अपनी हर सांस की ऋणी हूं
मैं खुद में क्या हूं
कुछ भी तो नहीं
थोड़ा थोड़ा सहयोग जो
दूसरों से न मिले तो
मेरे जीवन की गाड़ी का पहिया
आगे की तरफ एक कदम भी बढ़ नहीं पायेगा
मेरा अपना योगदान ही क्या है
मेरे मां बाप ने मुझे जन्म दिया
पाला पोसा, बड़ा किया
अपने पैरों पर खड़ा किया
आत्मनिर्भर बनाया
समाज में उठने बैठने के तरीके सिखाये
मुझे आत्म सम्मान से जीना सिखाया
मेरे गुरुओं ने मुझे शिक्षा दी,
दीक्षा दी
जीवन को सरल और सहज तरीके से जीने की एक कला सिखाई
मुझमें हौसला भरा
जीवित रहने की मन में एक इच्छा दी
मेरे बुजुर्गों ने मुझे जीवन पथ पर
आगे बढ़ने का अपना अनुभव मुझसे साझा किया
मेरे साथियों ने पग पग पर मुझे सहारा दिया
मैं रास्ते से कहीं भटकी तो मुझे
अंगुली पकड़ कर घर तक पहुंचाया
उम्र में मुझसे जो छोटे थे
उन्होंने मुझे सहारा दिया, प्यार किया,
भरपूर मान सम्मान दिया
मुझे मेरा बचपन और यौवन याद दिलाया
प्रकृति ने मुझे दिन रात अपना सानिध्य और स्नेह भरा स्पर्श दिया
कुदरत के रंगों ने मुझे अपने रंगों से हमेशा रंगा और स्वस्थ रखा
जीव जंतुओं ने प्राकृतिक रूप से मुझे जीने की सलाह दी
दिल में कोई मैले विचार न रखो
एक ताजगी भरी सांस को मन में भरो और
हर किसी का भला करो
यह पाठ पढ़ाया
मैंने तो इस संसार में हर किसी से
कुछ न कुछ सीखा और उसे अपने जीवन में उतारा भी और
हमेशा सबके प्रति कृतज्ञता से भरी रही और
हर किसी की सदैव ऋणी रही।
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