कोई भी वस्तु हो
अब चाहे हो वह घर के कमरे में रखा कोई
एक या अनेक फर्नीचर जिसमें आप रहते हो और
उसे पसंद करते हो तो
सबसे पहला सवाल जो जेहन में उठता है वह यह कि
आप उस अलमारी या उस कुर्सी या उस बेड को ही
क्यों अधिक पसंद करते हैं औरों की तुलना में तो
मेरा तो सीधा सा जवाब है
जिस फर्नीचर के साथ जुड़ी होंगी
मेरे अपनों की अधिक से अधिक यादें
मेरे लिए तो फिर वही फर्नीचर सर्वश्रेष्ठ होगा सर्वोत्तम होगा
मुझे सबसे अधिक प्रिय होगा
मेरे लिए यादों का एक मकबरा होगा किसी ताजमहल से कम नहीं होगा
मेरे लिए वह एक मंदिर होगा
कोई पूजा स्थल होगा
कोई तीर्थ स्थल होगा
मेरे मां-बाप जो फर्नीचर इस्तेमाल करते थे
वह मेरे लिए एक अनमोल कुदरत के द्वारा प्रदत्त
एक तोहफे सा होगा
मैं इसे कभी खोना नहीं चाहूंगी
मैं उस फर्नीचर के जरिये
चाहे वह बेजान सही
अपने मां-बाप जो अब नहीं हैं इस
दुनिया में को पा लेती हूं
उनके यथार्थ में दर्शन कर पाती हूं
उनके अस्तित्व के स्पर्श को कहीं गहरे अपने
अंतर्मन में महसूस कर पाती हूं
फर्नीचर महज एक लकड़ी का बेजान टुकड़ा नहीं होता
उनके साथ समय के बहते दरिया में
हर पल हमारी यादों का एक संसार जुड़ा होता है
इस दुनिया में तरह तरह के लोग हैं
जो जीवित हैं उन्हें भी मृत के समान समझते हैं और
उनसे बेहद अपमानजनक व्यवहार करते हैं
ऐसे भी हैं जो बेजान वस्तुओं जैसे फर्नीचर आदि को
भगवान सदृश्य समझते हैं
उन्हें अपने करीब
बेहद करीब रखते हैं
ठीक वैसे जैसे कभी अपने जीवित
प्रियजनों को अपने सीने से
चिपकाकर रखते थे।
0 Comments