मोहब्बत


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मोहब्बत एक फूल है तो

खुशबू भी

तितली है तो उसका रंग भी

चिड़िया है तो उसका पंख भी

सागर है तो उसकी लहर भी

चांद है तो उसकी चांदनी भी

सूरज है तो उसकी गर्मी भी

दिन है तो उसका उजाला भी

रात है तो उसका अंधेरा भी

सितारा है तो उसका लश्कारा भी

रास्ता है तो उसकी मंजिल भी

ख्वाब है तो उसका आस भी

आशिक है तो उसकी आशिकी भी

कली है तो उसकी मासूमियत भी

चेहरा है तो उसकी खूबसूरती भी

जिस्म है तो उसकी खुशबू भी

नदी है तो उसका किनारा भी

सागर है तो उसकी लहर भी

मछली है तो उसकी आंख भी

हिरण है तो उसका उछाल भी

दीपक है तो उसकी बाती भी

रंग है तो उसकी चमक भी

दर्पण है तो उसकी तन्हाई भी

अंधेरा है तो उसकी परछाई भी

दीवार है तो उसकी ओट भी

घर है तो उसकी दहलीज भी

रोशनदान है तो उससे छनकती रोशनी भी

चूड़ी है तो उसकी खनक भी

पायल है तो उसकी छनक भी

आंख है तो उसका आंसू भी

कुआं है तो उसकी प्यास भी

नाव है तो उसका मांझी भी

जल की धार है तो पतवार भी

पेड़ है तो पत्ता भी

तना है तो जड़ भी

फल है तो डंठल भी

शूल है तो झाड़ भी

मेहंदी है तो हथेली भी

सहेली है तो संवेदना भी

दिल है तो धड़कन भी

नजर है तो जिगर भी

शिरा है तो उसमें दौड़ता लहू भी

चाकू है तो धार भी

सीना है तो तलवार भी

जिस्म है तो जान भी

पंख है तो परवाज भी

बादल है तो बिजली भी

आसमान है तो जमीं भी

जिंदगी है तो मौत भी

अपनी है तो पराई भी

मिलन है तो जुदाई भी

कभी तन्हाई, कभी रुसवाई, कभी शहनाई सी

मोहब्बत एक भीगे गुलाब सी

मोहब्बत कभी एक आग सी

मोहब्बत कभी एक शराब के नशे सी

मोहब्बत रास आ जाये तो जिंदगी सी नहीं तो

मौत की आहट सी।


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