मेरा तकिया
मेरा साथी
रात को मेरे संग होता
जैसे दीया संग बाती
यह रात भर सोता या जगता
इसकी यह ही जाने
मैं तो इसकी गोद में सिर रखकर
सो जाती
मां का जैसे एक स्पर्श पाते पाते
गहरी नींद के सपनों में कहीं खो जाती
सुबह उठती तो यह मेरी गोद में
एक बच्चे सा होता
इसका मैं भरपूर दुलार करती
कभी मैं इसकी मां तो यह
मेरा बेटा होता
कभी यह मेरी मां और मैं इसकी
बेटी होती
हम दोनों के बीच रिश्ता एक
अनोखा और प्यार भरा है
कभी मेरे आंसू छलक कर
इस पर गिर जाते तो
उन्हें यह एक सांस में सोख
लेता
मेरे रेशमी बाल टूटकर इसकी
देह पर जो बिखर जाते तो
सुबह मैं उन्हें फूलों सा चुनकर
फेंक देती फर्श पर
मेरा तकिया चाहे कैसी हों
परिस्थितियां मुझे आईना
दिखाता एक स्वच्छ सा और
कहता हर पल मुस्कुराने को।
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