प्यार एक बहुत विस्तृत भावना है लेकिन
अधिकतर लोग आकर्षण, सुंदरता,
चेहरे, जिस्म से आगे की बात
नहीं सोच पाते
आत्मा के सौंदर्य को नहीं छू पाते
जिस्म के रिश्तों तक ही सीमित रह जाते हैं
अपने मन की जमीन को दूसरे के मन के आकाश से
नहीं जोड़ पाते
दिल में प्यार का एक अथाह सागर
होता है
जी में आता है मेरे कि
उसे उड़ेल दूं जो भी मेरे सामने पड़े लेकिन
कदम पीछे हटाने पड़ते हैं
मन को कहीं समझाना पड़ता है
प्यार की भाषा पर ताला लगाना
पड़ता है सदा के लिए
यह सोचकर भी कि सामने वाला
पता नहीं मेरे सच्चे प्रेम का
अर्थ क्या लगाये
मेरा प्यार सच्चा है लेकिन
दूसरे के विचार दूषित हुए तो।
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