घर से निकालो
बाहर कदम जो बाल्यावस्था में तो
किसी के जीवन की शुरुआत उसके विद्यालय से ही तो होती है
उस विद्यालय का अध्यापक जो
हो अच्छा तो छात्र के मन मस्तिष्क पर
एक दूरगामी अच्छा प्रभाव पड़ता है
बालक तो होता है अबोध
मासूम
एक कच्ची मिट्टी समान
उसको एक गुरु का सही
मार्गदर्शन, सानिध्य और
आशीर्वाद जो होता रहे निरंतर ही
प्राप्त तभी
उसका जीवन संवरता है
एक फूल सा महकता और
खिलखिलाता हुआ खिलता है
एक हीरे को एक सही जौहरी ही
तराश सकता है
एक बालक को उसका स्कूल टीचर ही जो होता है
उसके जीवन की नींव, उसका भविष्य निर्माता बन सकता है।
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