लिखने वाले में
जादू नहीं होता
यह बात सौ फीसदी सच है कि
कई बार कलम ही जादुई होती है
उस जादुई कलम के हाथ में आते ही
दिल और दिमाग पर एक जादू का
असर होता है
ऐसा लगता है जैसे उस कलम ने
उस लेखक के तार जोड़ दिये हों
किसी ब्रह्मांड की शक्तियों से
न वह लेखक सोच रहा होता है
न कोई उसे कुछ लिखने के लिए
मजबूर कर रहा होता है
कलम कागज के संपर्क में आते ही
उस पर स्याही से अपनी ही
लिखावट में कुछ लफ्जों के मोतियों में
रंग भरने लगती है और
बन जाती है एक कहानी सुहानी सी
यह तो भगवान ही जाने
न जाने कैसे।
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