जंगल तो हर कहीं है


0

यह दुनिया भी

एक जंगल है

इस जंगल में विचरने पर

तुम्हारे हाथ क्या लगता है

यह तुम्हारी किस्मत पर निर्भर करता है 

कोई भला मनुष्य तुम्हारे सामने पड़ता है एक गाय सा या

कोई हिंसक एक शेर सा

कोई स्वादिष्ट मीठा फल किसी पेड़ की डाल पर 

तुम्हें लटका खाने के लिए मिलता है या

पांव में कांटा चुभने के लिए किसी

झाड़ में तुम्हारा पैर फंसता है

कोई अनुमान नहीं लगाया

जा सकता है

पेड़ों की हरियाली शीतलता प्रदान करती मिलेगी या

सड़क एक पथरीली तुम्हारे पांवों को छलनी करती

तुम्हारी मंजिल की दिशा तय करती तुम्हें मिलेगी

सब प्रभु की इच्छा पर निर्भर करता है

मन का जंगल भी जब हो अव्यवस्थित तो 

उसे मन के मंदिर में ही बैठकर शांति से भजन गाकर 

कुछ देर मन को समझा लें

जंगल तो हर कहीं है

कभी किसी को संभालते

कभी ठोकर लगाते

कभी हौसला देते

कभी राह भटकाते

कभी मंजिल तक पहुंचाते

कभी कुछ विस्मित करते

कभी सब सामान्य से दृश्य

दिखाते

कभी जलते हुए

कभी जल छिड़क कर आग

बुझाते

जो जंगल भी सामने आयेंगे

उनमें प्रवेश पाकर

उनके रास्तों पर चलकर

सफर तो तय करना ही पड़ेगा

इसका अंजाम चाहे फिर जो भी हो।


Like it? Share with your friends!

0

0 Comments

Choose A Format
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals