आसमान में उड़ता परिंदा


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यह जमीं और

यह आसमां क्या मेरा ही है

आसमान में उड़ता परिंदा

इसके बदले हुए रंगों को देखकर

कहीं अपने घर का रास्ता न भटक जाये 

मैं भी तो इसकी मदद नहीं कर सकती 

रंगों के गुबार में मिलकर मैं भी कहीं

खो सी रही हूं

यह आसमान के रंगों को चीरता

हुआ

मेरे पास जमीं पर जो कहीं उतर कर

आ जाये तो

यह तो फिर तय है कि

मैं इसे अपने आशियाने में

जब तक यह रहना चाहे

गुजर बसर करने का इंतजाम कर दूंगी इसे सहारा दे दूंगी

इधर-उधर भटकने के लिए बेसहारा नहीं छोडूंगी।


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